हर वित्त-वर्ष की शुरुआत में दफ़्तरों का एक ही दृश्य है: HR का ईमेल — "रिजीम चुनिए" — और उसके बाद अफ़वाहों का बाज़ार। "नई में कोई बचत नहीं दिखा सकते, मत लेना", "पुरानी अब बेकार है" — दोनों वाक्य आधे-अधूरे हैं। सच सरल और व्यक्तिगत है: सही रिजीम वह है जिसमें *आपका* टैक्स कम बनता है, और यह सिर्फ़ आपकी असल कटौतियों के आँकड़े से तय होता है — पड़ोसी की राय से नहीं।
ज़रूरी चेतावनी पहले: दरें, स्लैब और नियम बजट-दर-बजट बदलते हैं — यह लेख कोई दर नहीं बताता, चुनाव का *ढाँचा* बताता है, जो हर साल के ताज़ा नियमों पर वैसा ही लागू होता है। अंतिम गणना हमेशा आयकर विभाग के आधिकारिक कैलकुलेटर या किसी योग्य सलाहकार से मिलाइए।
दो दर्शन, एक तराज़ू
दोनों रिजीम दो दर्शन हैं। पुरानी कहती है: दरें ऊँची, पर सरकार जिन कामों को बढ़ावा देना चाहती है — जीवन बीमा, PPF/ELSS जैसी बचतें (80C), स्वास्थ्य बीमा (80D), होम-लोन ब्याज, HRA — उन पर आमदनी घटाकर टैक्स लगाएँगे। नई कहती है: दरें नीची और सीधी, पर कटौतियों की सूची छोटी। यानी तराज़ू का एक पलड़ा आपकी "कटौतियों का कुल जोड़" है, दूसरा "नई रिजीम की सीधी राहत"।
इसीलिए मोटा पैटर्न यह बनता है: जिसकी ज़िंदगी में कटौतियाँ बड़ी और सचमुच चल रही हैं — होम-लोन का ब्याज, भरा-पूरा 80C, किराये पर HRA — उसका पलड़ा प्रायः पुरानी की ओर झुकता है; जिसकी कटौतियाँ छोटी हैं या जो काग़ज़ी झंझट से मुक्त रहना चाहता है, उसे नई प्रायः बराबर या बेहतर बैठती है। "प्रायः" पर ध्यान दीजिए — सीमा-रेखा हर परिवार की अलग जगह कटती है, और उसे सिर्फ़ गणना ही खोज सकती है।
तीस मिनट की विधि
क़दम एक: बीते साल की असल कटौतियाँ सूचीबद्ध कीजिए — अनुमान नहीं, रसीद वाली असल रक़में: 80C में क्या-क्या गया, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, होम-लोन ब्याज, HRA की पात्र रक़म। क़दम दो: आयकर विभाग के आधिकारिक ई-कैलकुलेटर में अपनी अनुमानित आमदनी दोनों रिजीम में डालिए — एक बार कटौतियों समेत पुरानी में, एक बार नई में। क़दम तीन: दोनों अंतिम टैक्स आमने-सामने रखिए और छोटा चुनिए। बस — यही पूरी विधि है; तीस मिनट में भावना का काम गणित कर देता है।
दो व्यावहारिक बातें और: वेतनभोगी आम तौर पर हर साल रिजीम बदल सकते हैं, इसलिए यह हिसाब सालाना रस्म बनाइए — शादी, होम-लोन, किराये का बदलना जैसी घटनाएँ सीमा-रेखा खिसका देती हैं। और चुनाव जो भी हो, बचत-निवेश बंद मत कीजिए: PPF, बीमा या SIP का मूल्य टैक्स-छूट से नहीं, आपके भविष्य से तय होता है। टैक्स-बचत निवेश की मिठाई है, थाली नहीं।