जब आप कोई निवेश — जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति — मुनाफ़े में बेचते हैं, तो उस मुनाफ़े को कैपिटल गेन कहते हैं, और उस पर कर लग सकता है। बहुत-से निवेशक बेचने के बाद इस कर से हैरान होते हैं।
इसकी बुनियादी समझ आपको सुखद-अप्रिय आश्चर्य से बचाती है।
लॉन्ग टर्म बनाम शॉर्ट टर्म
कर की गणना में एक बड़ा फ़र्क़ यह है कि आपने निवेश कितने समय रखा। एक निश्चित अवधि से ज़्यादा रखने पर वह “लॉन्ग टर्म” माना जाता है और आमतौर पर कर अलग (अक्सर कम) होता है; कम समय रखने पर “शॉर्ट टर्म”।
यह अवधि और दरें अलग-अलग तरह के निवेश (इक्विटी, डेट, संपत्ति) के लिए भिन्न होती हैं।
योजना बनाकर बेचें
कर को समझकर बेचने का समय चुनना समझदारी है — पर कर बचाने के लिए किसी अच्छे निर्णय को टालना भी सही नहीं। मक़सद है कर को ध्यान में रखना, उसे अपना मालिक न बनने देना।
रिकॉर्ड (ख़रीद-बिक्री की तारीख़ और मूल्य) रखना गणना को आसान बनाता है।
नियम बदलते रहते हैं
कैपिटल गेन की अवधि, दरें और छूट समय के साथ बदलती रहती हैं और निवेश के प्रकार पर निर्भर करती हैं। इसलिए बड़े लेन-देन से पहले नवीनतम नियम जाँचें और ज़रूरत हो तो कर-विशेषज्ञ से सलाह लें।
यह लेख सामान्य शैक्षिक जानकारी है, कर सलाह नहीं।