लोन लेते समय ज़्यादातर लोग सिर्फ़ एक चीज़ देखते हैं — “EMI कितनी है?” छोटी EMI राहत जैसी लगती है, पर यह पूरी तस्वीर नहीं है। EMI के पीछे ब्याज दर, अवधि और आपके द्वारा चुकाई जाने वाली कुल रक़म की कहानी छिपी होती है।
कर्ज़ लेने से पहले असली लागत समझना ज़रूरी है।
लंबी अवधि का धोखा
अवधि लंबी करने पर EMI घट जाती है, जिससे लोन “सस्ता” लगता है। पर लंबी अवधि का मतलब है ज़्यादा महीनों तक ब्याज देना, यानी कुल मिलाकर कहीं अधिक रक़म चुकाना। छोटी EMI अक्सर बड़ी कुल लागत छिपाती है।
इसलिए सिर्फ़ EMI नहीं, कुल चुकाई जाने वाली रक़म देखें।
देखने लायक़ बातें
ब्याज दर (और वह घटती-बढ़ती है या तय), प्रोसेसिंग फ़ीस और अन्य शुल्क, समय से पहले चुकाने (प्रीपेमेंट) के नियम, और कुल चुकाई जाने वाली रक़म — इन सबको देखें। और सबसे ज़रूरी: क्या EMI आपके बजट में आराम से आती है, तब भी जब कोई अनपेक्षित ख़र्च आए।
ऊँची ब्याज दर वाले कर्ज़ से ख़ास सावधान रहें।
कर्ज़ सोच-समझकर
कर्ज़ एक उपयोगी औज़ार हो सकता है जब वह किफ़ायती हो, किसी टिकाऊ चीज़ के लिए हो, और उसकी किश्तें आराम से चुकाई जा सकें। इन कसौटियों पर परखें, फिर निर्णय लें।
यह लेख सामान्य जानकारी है, कोई ऋण सलाह नहीं।