क्रेडिट स्कोर आज कई कर्ज़ और कार्ड के फ़ैसलों में मायने रखता है, फिर भी इसके बारे में कई ग़लतफ़हमियाँ फैली हैं। इन मिथकों पर भरोसा करके लोग अनजाने में ग़लत क़दम उठा लेते हैं।

कुछ आम मिथकों को साफ़ करना उपयोगी है।

मिथक: अपना स्कोर देखने से वह घटता है

यह एक आम डर है, पर आमतौर पर अपना ख़ुद का स्कोर देखना उसे नहीं घटाता। नियमित रूप से अपना स्कोर और रिपोर्ट देखना अच्छी आदत है, ताकि कोई ग़लती या धोखाधड़ी जल्दी पकड़ में आए।

जो चीज़ें स्कोर पर असर डालती हैं वे हैं — भुगतान का इतिहास और कर्ज़ का व्यवहार, न कि ख़ुद देखना।

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मिथक: कार्ड-कर्ज़ से दूर रहने पर स्कोर अच्छा

हक़ीक़त में, क्रेडिट स्कोर आपके कर्ज़ को ज़िम्मेदारी से संभालने के इतिहास पर बनता है। कभी कोई कार्ड या कर्ज़ न लेने पर आपके पास कोई क्रेडिट इतिहास ही नहीं होता, जिससे स्कोर बनने में दिक़्क़त हो सकती है।

मुद्दा कर्ज़ लेना नहीं, बल्कि उसे समय पर और समझदारी से चुकाना है।

असली बातें जो मायने रखती हैं

स्कोर पर सबसे अधिक असर आमतौर पर पड़ता है — समय पर भुगतान, अपनी क्रेडिट लिमिट का बहुत बड़ा हिस्सा हर समय इस्तेमाल न करना, और एक स्थिर, ज़िम्मेदार इतिहास। मिथकों के बजाय इन पर ध्यान दें।

यह लेख सामान्य जानकारी है।

स्कोर बनता किन हिस्सों से है

भ्रम इसलिए फैलते हैं क्योंकि लोग यह नहीं जानते कि स्कोर किन चीज़ों से बनता है। ढाँचा कुछ मुख्य हिस्सों में बँटा होता है और उनका भार बराबर नहीं होता।

सबसे बड़ा भार भुगतान के इतिहास का होता है — क्या किश्तें और बिल समय पर चुके। एक भी चूक कई महीनों तक दिखती है, और लगातार चूक सबसे तेज़ी से स्कोर गिराती है।

दूसरा बड़ा हिस्सा उपयोग अनुपात है, यानी उपलब्ध सीमा में से कितनी इस्तेमाल हो रही है। यह वह हिस्सा है जिसे सबसे जल्दी सुधारा जा सकता है, अक्सर एक ही महीने में।

तीसरा है क्रेडिट इतिहास की आयु। पुराना खाता, जो नियमित चलता रहा हो, स्कोर को स्थिरता देता है। यही कारण है कि पुराना कार्ड बंद करना अक्सर उल्टा पड़ता है।

चौथा है ऋणों का मिश्रण — केवल असुरक्षित ऋण होने के बजाय सुरक्षित और असुरक्षित दोनों का अनुभव होना बेहतर माना जाता है।

और पाँचवाँ, हाल में की गई पूछताछ की संख्या। कम समय में कई जगह आवेदन करना यह संकेत देता है कि व्यक्ति ऋण के लिए बेचैन है, और यह संकेत स्कोर पर असर डालता है।

कठोर और नरम पूछताछ

यह वह अंतर है जिससे सबसे लोकप्रिय भ्रम पैदा होता है — कि अपना स्कोर देखने से स्कोर गिर जाता है।

जब आप ख़ुद अपनी रिपोर्ट देखते हैं, वह नरम पूछताछ होती है। वह रिपोर्ट में दर्ज होती है पर स्कोर पर कोई असर नहीं डालती, चाहे आप हर महीने देखें।

जब कोई ऋणदाता आपके आवेदन पर आपकी रिपोर्ट माँगता है, वह कठोर पूछताछ होती है। वह स्कोर पर थोड़ा असर डालती है और कुछ समय तक रिपोर्ट में दिखती है।

इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि एक साथ चार-पाँच जगह ऋण के लिए आवेदन करना स्कोर के लिए अच्छा नहीं। तुलना करनी है तो पहले दरों के बारे में पूछताछ कीजिए, आवेदन बाद में एक या दो जगह ही कीजिए।

और अपनी रिपोर्ट नियमित रूप से देखना न केवल सुरक्षित है, बल्कि ज़रूरी है — क्योंकि रिपोर्ट में दर्ज ग़लतियाँ उसी तरह मिलती हैं।

साल में कम से कम एक बार अपनी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट पढ़िए, केवल स्कोर की संख्या नहीं। संख्या बताती है कि क्या हुआ; रिपोर्ट बताती है कि क्यों हुआ।

रिपोर्ट में ग़लतियाँ और उन्हें सुधारना

क्रेडिट रिपोर्ट में ग़लतियाँ असामान्य नहीं हैं, और वे अक्सर वहीं पकड़ी जाती हैं जहाँ किसी का आवेदन बिना स्पष्ट कारण के अस्वीकार हो जाता है।

सबसे आम ग़लती है वह ऋण या कार्ड दिखना जो चुकाया जा चुका है पर बंद के रूप में दर्ज नहीं हुआ। दूसरी, किसी और के नाम का खाता आपकी रिपोर्ट में जुड़ जाना, आमतौर पर नाम मिलने के कारण।

तीसरी, समय पर चुकाई गई किश्त का देर से दर्ज होना। चौथी, वही ऋण दो बार दिखना — एक बार मूल ऋणदाता से और एक बार उस संस्था से जिसे वह हस्तांतरित हुआ।

सुधार की प्रक्रिया निःशुल्क है। ब्यूरो की वेबसाइट पर विवाद दर्ज कीजिए, संबंधित प्रविष्टि चिह्नित कीजिए, और अपने पास मौजूद प्रमाण संलग्न कीजिए — अनापत्ति प्रमाणपत्र, भुगतान की रसीद, या खाता बंद होने का पत्र।

ब्यूरो उस प्रविष्टि की पुष्टि उस बैंक या संस्था से करता है जिसने वह सूचना भेजी थी। इसीलिए समानांतर रूप से उस संस्था को भी लिखना उपयोगी होता है; स्रोत सुधरे बिना प्रविष्टि लौट सकती है।

इस प्रक्रिया में कुछ हफ़्ते लगते हैं, इसलिए इसे किसी बड़े ऋण के आवेदन से पहले शुरू करना चाहिए, आवेदन अस्वीकार होने के बाद नहीं।

स्कोर सुधारने में कितना समय लगता है

यह वह सवाल है जो सबसे ज़्यादा पूछा जाता है और जिसका जवाब सबसे कम पसंद आता है: कोई तुरंत उपाय नहीं है, और जो सेवा तुरंत सुधार का वादा करे उससे दूर रहना चाहिए।

सबसे तेज़ असर उपयोग अनुपात घटाने का होता है। बिलिंग तारीख़ से पहले शेष कम कर देने का प्रभाव अगली रिपोर्ट में ही दिख सकता है — यानी एक से दो महीने में।

भुगतान के इतिहास का सुधार धीमा है। हर समय पर चुकाई गई किश्त धीरे-धीरे भरोसा बनाती है, और पुरानी चूक का असर कई महीनों में घटता है, मिटता नहीं।

इतिहास की आयु समय के साथ अपने-आप बढ़ती है, बशर्ते पुराने खाते खुले रहें और नियमित चलते रहें। यह वह हिस्सा है जिसे केवल धैर्य सुधारता है।

इसलिए एक व्यावहारिक अपेक्षा यह है: अनुशासित व्यवहार से कुछ महीनों में दिखने लायक़ सुधार आता है, और बड़ी क्षति की भरपाई में एक से दो साल लग सकते हैं।

और सबसे ज़रूरी बात: स्कोर लक्ष्य नहीं है। वह उन आदतों का पैमाना है जो आप वैसे भी अपनाना चाहते हैं। जो व्यक्ति समय पर चुकाता है और सीमा के भीतर रहता है, उसका स्कोर अपने-आप ठीक हो जाता है।

बिना स्कोर वाले लोग

एक श्रेणी ऐसी है जिसकी चर्चा कम होती है: वे लोग जिन्होंने कभी कोई कार्ड या ऋण नहीं लिया, और इसलिए जिनका कोई स्कोर ही नहीं है।

ऐसे व्यक्ति की रिपोर्ट में स्कोर के बजाय एक विशेष संकेत होता है जिसका अर्थ है "पर्याप्त इतिहास नहीं"। यह ख़राब स्कोर नहीं है, पर ऋणदाता के लिए यह भी एक अनिश्चितता है।

इसका नतीजा यह होता है कि जिस व्यक्ति ने जीवन भर कभी उधार नहीं लिया, उसे पहला गृह ऋण लेते समय अक्सर कठिनाई होती है — जो अन्यायपूर्ण लगता है और तकनीकी रूप से समझ में आता है।

इसका सामान्य समाधान यह है कि एक छोटी शुरुआत की जाए: एक सादा कार्ड या किसी जमा के विरुद्ध लिया गया कार्ड, जिसका उपयोग छोटे नियमित ख़र्चों के लिए हो और जिसका बिल हर महीने पूरा चुकाया जाए।

कुछ महीनों के नियमित व्यवहार के बाद इतिहास बनना शुरू हो जाता है। यहाँ उद्देश्य उधार लेना नहीं है; उद्देश्य यह दर्ज कराना है कि आप समय पर चुकाते हैं।

और जिनका स्कोर पहले अच्छा था पर अब कोई सक्रिय खाता नहीं है, उनके लिए भी यही बात लागू होती है। इतिहास पुराना होकर धुँधला पड़ जाता है, इसलिए एक छोटा सक्रिय खाता बनाए रखना उपयोगी है।

अंत में एक बात

स्कोर एक चरित्र प्रमाणपत्र नहीं है। वह केवल यह दर्ज करता है कि आपने उधार लेकर उसे कैसे चुकाया, और उससे ज़्यादा कुछ नहीं कहता।

जिसका स्कोर कम है वह बुरा व्यक्ति नहीं है, और जिसका ऊँचा है वह अमीर नहीं है। दोनों बातें अलग-अलग हैं और उन्हें अलग ही रखना चाहिए।