क्रेडिट स्कोर आज कई कर्ज़ और कार्ड के फ़ैसलों में मायने रखता है, फिर भी इसके बारे में कई ग़लतफ़हमियाँ फैली हैं। इन मिथकों पर भरोसा करके लोग अनजाने में ग़लत क़दम उठा लेते हैं।
कुछ आम मिथकों को साफ़ करना उपयोगी है।
मिथक: अपना स्कोर देखने से वह घटता है
यह एक आम डर है, पर आमतौर पर अपना ख़ुद का स्कोर देखना उसे नहीं घटाता। नियमित रूप से अपना स्कोर और रिपोर्ट देखना अच्छी आदत है, ताकि कोई ग़लती या धोखाधड़ी जल्दी पकड़ में आए।
जो चीज़ें स्कोर पर असर डालती हैं वे हैं — भुगतान का इतिहास और कर्ज़ का व्यवहार, न कि ख़ुद देखना।
मिथक: कार्ड-कर्ज़ से दूर रहने पर स्कोर अच्छा
हक़ीक़त में, क्रेडिट स्कोर आपके कर्ज़ को ज़िम्मेदारी से संभालने के इतिहास पर बनता है। कभी कोई कार्ड या कर्ज़ न लेने पर आपके पास कोई क्रेडिट इतिहास ही नहीं होता, जिससे स्कोर बनने में दिक़्क़त हो सकती है।
मुद्दा कर्ज़ लेना नहीं, बल्कि उसे समय पर और समझदारी से चुकाना है।
असली बातें जो मायने रखती हैं
स्कोर पर सबसे अधिक असर आमतौर पर पड़ता है — समय पर भुगतान, अपनी क्रेडिट लिमिट का बहुत बड़ा हिस्सा हर समय इस्तेमाल न करना, और एक स्थिर, ज़िम्मेदार इतिहास। मिथकों के बजाय इन पर ध्यान दें।
यह लेख सामान्य जानकारी है।