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म्यूचुअल फंड चुनते समय एक बुनियादी सवाल आता है: इंडेक्स फंड लें या एक्टिव फंड? इंडेक्स फंड सिर्फ़ किसी बाज़ार सूचकांक (जैसे निफ्टी) की नक़ल करता है, जबकि एक्टिव फंड में फंड मैनेजर “बाज़ार को हराने” की कोशिश करता है।

दोनों के अपने तर्क हैं, और सही चुनाव समझ से होता है, प्रचार से नहीं।

लागत का बड़ा फ़र्क़

इंडेक्स फंड की लागत (एक्सपेंस रेशियो) आमतौर पर बहुत कम होती है, क्योंकि इसमें किसी विशेषज्ञ की भारी फ़ीस नहीं लगती। एक्टिव फंड की फ़ीस ज़्यादा होती है, और यह फ़ीस हर साल आपके रिटर्न से कटती है।

लंबी अवधि में यह छोटा-सा अंतर कंपाउंडिंग के कारण बड़ी रक़म बन जाता है।

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क्या एक्टिव फंड सचमुच जीतते हैं?

सच यह है कि लंबी अवधि में बहुत-से एक्टिव फंड अपने सूचकांक को लगातार नहीं हरा पाते, और पहले से यह पहचानना कठिन है कि कौन-सा हराएगा। इसलिए कई समझदार निवेशक कम लागत वाले इंडेक्स फंड को एक भरोसेमंद आधार मानते हैं।

इसका अर्थ यह नहीं कि हर एक्टिव फंड ख़राब है; कुछ अच्छे भी हैं, पर उन्हें चुनना और उन पर टिके रहना कठिन है।

समझदारी की राह

नए और व्यस्त निवेशक के लिए एक कम लागत वाला, व्यापक इंडेक्स फंड एक सरल, टिकाऊ शुरुआत है। जो अधिक समझते और मानते हैं कि कोई विशेष एक्टिव फंड मूल्य देगा, वे उसे जोड़ सकते हैं — पर लागत और निरंतरता पर नज़र रखें।

यह लेख सामान्य जानकारी है; निवेश से पहले अपनी स्थिति और ज़रूरत के अनुसार सोच-समझकर, और ज़रूरत हो तो सलाहकार से बात करके निर्णय लें।